Poem : थक गया हूँ ज़िंदगी से
थक गया हूँ ज़िंदगी सेऔर तेरी बंदगी सेकुछ इश्क़ को आराम दूंकुछ और राहें थाम लूँ मुड़ से गये थे रास्तेवापस उन्हें देखूं ज़राखोलूं मैं क्या कमरा नयाटूटा हुआ सीलन भरा आवाज़ें जो घुल गयी थीज़िंदगी के शोर मेंगाँठि जो पड़ गयी थीजीवन प्रवाह की डोर में आज़ाद हो जाने दूं मैं उन कोदरिया सा … [Read more…]



