Poem : थक गया हूँ ज़िंदगी से

थक गया हूँ ज़िंदगी सेऔर तेरी बंदगी सेकुछ इश्क़ को आराम दूंकुछ और राहें थाम लूँ मुड़ से गये थे रास्तेवापस उन्हें देखूं ज़राखोलूं मैं क्या कमरा नयाटूटा हुआ सीलन भरा आवाज़ें जो घुल गयी थीज़िंदगी के शोर मेंगाँठि जो पड़ गयी थीजीवन प्रवाह की डोर में आज़ाद हो जाने दूं मैं उन कोदरिया सा … [Read more…]

Poem : मेरी खुशियों का पौधा

मेरी खुशियों का पौधाकभी बड़ा नहीं होताकुछ शाखें निकलती हैंकुछ हरे पत्ते भीकुछ आशायें भी उगती हैकुछ घर भी बन जाते हैंमगर फिर कोई झोंकाफिर कोई टुकड़ा धूप काउड़ा देता है जला देता हैकभी कभी जड़ से ही हिला देता हैऔर बिखरी हुई शाखों मेंफिर से एक बीज ढूंढता हूँ मैंजिस बीज से उगेगाफिर एक … [Read more…]

Poem : ज़िंदा रहने का अदब

बुझती आँखों की तड़पउठती नींदों की थकनसोच में डूबे हुएमेरे माथे की शिकनसाथ है मेरे भी कुछयादों के पोशीदा सबबढूँढते रहते हैं वोजाने क्या सुबहो और शबमाज़ी की आँधी कोईरात का चाँद कहींज़ख़्म की वादियों मेंदर्द का दरिया कहींहर रोज़ के वहीबुझते हुए सिलसिलेघटती हुई ज़िंदगीबढ़ते हुए शिकवे गिलेखाक में मिलते हुएजज़्बातों के आशियाँकतरा कतरा … [Read more…]

Poem : प्यार-को-प्यार-ही-रहने-दो

कोई परिभाषा से परेआशा प्रत्याशा से परेइक हृदय में ज्वाला बनक्षीण क्षीण जलता हुआभावनाओं के पवन सेजीता और मरता हुआसंदेह और विश्वास कीधाराओं से लड़ता हुआएक पल में अल्प हो केदूजे में बढ़ता हुआनाम क्या दूं तुझ को मैंजब खुद को ही समझा ना मैंप्राप्य और अप्राप्य कीदुविधा में उलझा हूँ मैंइस घुटन को जलने … [Read more…]

Poem: तुम आओगे

तुम आओगेकुछ  है मुझेविश्वास साकुछ है मुझेआभास साक्षितिज पे जब लालिमाखिल उठेगी झूम केआग जल के अधरों कोसुस्त होगी चूम केस्मृति के धूमिल  प्रष्ठों सेएक पुराना अध्याय लेतुम आओगेइक ठिठुरती रात कोओस को ओढ़ करविलुप्त होती पग डांडियों पेअंधकार तोड़ करअल्प होते क्षण विक्षणपूर्णिमा के चाँद सेश्वेत वज्र से बरसतेतुम आओगेजब श्वासहो जायेगी मंदजब भीष्म होगाअंतर्द्वनधजब होने लगेगामन शिथिलजब … [Read more…]

Vital Stats of BBG in 2015

We had a great year in 2015 as we spread our wings all over the place. Here are some stats about our FB page. Daily Page Engaged Users – 54,11,118 Daily Total Reach – 7,19,01,228 Daily Total Impressions – 21,47,30,501 Top Five Posts   ज़िन्दगी तेरे गम ने हमेंरिश्ते नए समझाए Posted by Bhoole Bisre … [Read more…]

Poem: सब तिरंगे बेचते हैं

आज देखा एक बच्ची को उस गली के मोड़ पे एक हाथ में चन्द सिक्के एक मैं कुछ दस तिरंगे चेहरे पर ना कोई शिकवा ना कोई खुशी का सुराग बस एक क्रम ज़िंदगी का जो बुझाये पेट की आगसब के है अपने तरीकेसब तिरंगे बेचते हैंऔर फिर देखा कहीं पेएक नेता सिरफिराज़िंदगी भर लिप्त … [Read more…]

One night at Bangalore Airport

So travel always brings along experiences. Some good, some bad and some you just can’t figure out where to put them. So I landed today after a brief trip to Delhi. As I usually do on short trips, I drive to airport and park it there to avoid the taxi hassles. The only think I … [Read more…]