Poem : ज़िंदा रहने का अदब
बुझती आँखों की तड़पउठती नींदों की थकनसोच में डूबे हुएमेरे माथे की शिकनसाथ है मेरे भी कुछयादों के पोशीदा सबबढूँढते रहते हैं वोजाने क्या सुबहो और शबमाज़ी की आँधी कोईरात का चाँद कहींज़ख़्म की वादियों मेंदर्द का दरिया कहींहर रोज़ के वहीबुझते हुए सिलसिलेघटती हुई ज़िंदगीबढ़ते हुए शिकवे गिलेखाक में मिलते हुएजज़्बातों के आशियाँकतरा कतरा … [Read more…]

