प्रकृति और न्याय

प्रकृति में न्याय नहीं होताबस प्रतीत होता है मानवों कोखुद को छलावा देने के लिएहम प्रकृति के एक हिस्से को लेते हैंऔर समय से सीमित कर देते हैंऔर न्याय की परिकल्पना कर लेते हैं प्रजातियां आती हैंऔर प्रजातियां लुप्त हो जाती हैंऔर हम को अपने कर्म के फल कीचिंता रहती हैलगता है कि अच्छा करने … [Read more…]






