Poem : तू कौन है

तू वो है जो तू चाहता था हमेशा से होना
तू वो भी है जो वो बन नहीं पाया
तू वो भी है जो समझती है दुनिया तुझ को
तू वो भी है जो दुनिया को समझ में नहीं आता

तू वो भी है जो कोशिकाओं के जुड़ने से बनता है
तू वो भी है जो मानव जीनोम को जीवित रखने का माध्यम है
तू वो भी है जो हाइड्रोजन और कार्बन का मिश्रण मात्र है
तू वो भी है जो इवोल्यूशन का एक क्षणिक पड़ाव है

तू वो भी है जो किसी के जीने का कारण है
तू वो भी है जो किसी के मरने का कारण है
तू वो भी है जो किसी की भावनाओं में जीवित हो उठता है
तू वो भी है जो किसी की नफ़रतों में घुट घुट के मरता है

एक स्तर पर सोचेगा
तो तू सब कुछ है
एक और स्तर पर
तू कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं

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