अर्थहीन

अर्थहीन है ये जीवन और अर्थ की आवश्यकता भी क्या है मानवीय अहंकार है स्वयं के अस्तित्व में अर्थ ढूँढना अपनी प्रजाति को श्रेयस्कर समझने के लिए भाषा का अहंकार धर्म का अहंकार विज्ञान का अहंकार कुछ धर्मों के अनुसार जन्म और पुनर्जन्म आत्मा और परमात्मा कुछ और धर्मों के अनुसार स्वर्ग और नर्क अप्सराएँ … [Read more…]

प्रश्न

प्रश्न तो बहुत से हैं मुझे तुम से मेरे भविष्यवक्ता जीवन स्वास्थ्य खुशी कारोबार प्यार के रिश्ते रिश्तों में प्यार अपना और अपनों का रक्त रंजित सपनों का उत्तर भी बहुत हैं तुम्हारे पास भविष्यवक्ता ना मैं वापस आऊंगा तुम से लड़ने अगर तुम गलत होगे ना ही धन्यवाद कहने अगर तुम सही होगे पर … [Read more…]

Poem : रिश्ता

बस दो ही रिश्ते अहम होते हैंएक दर्द का रिश्तादूसरा दर्द से रिश्ता दर्द के रिश्ते में होता हैबहुत कुछ साझा करने के लिएकई बार उस से दर्द कम होता हैकई बार बस बह जाता हैकभी बस एक अहसास देता हैकि दुनिया में और भी हैंजो दर्द के दरिया में डूबे हुए हैंकभी तुम से … [Read more…]

Poem : तू कौन है

तू वो है जो तू चाहता था हमेशा से होनातू वो भी है जो वो बन नहीं पायातू वो भी है जो समझती है दुनिया तुझ कोतू वो भी है जो दुनिया को समझ में नहीं आता तू वो भी है जो कोशिकाओं के जुड़ने से बनता हैतू वो भी है जो मानव जीनोम को … [Read more…]

प्रेम

मैं तुम से प्रेम करता हूँ इस वाक्य का कोई भी महत्व नहीं है ये बस अभिव्यक्ति है समय की किसी एक बिन्दु पर जो बदल जाती है किसी और बिन्दु पर एक क्षणिक आभास है एक क्षणिक भावना का जो किसी और क्षण में बदल जाने से कुछ अधिक दुख देता है प्रेम तो … [Read more…]

I don’t need a national language

I love my country I love my country men I love my country men’s love for their mother tongue I don’t need a national language I love it when my cab driver changes songs to my mother tongue I love it even when he keeps listening to songs in his own mother tongue I love … [Read more…]

Poem: मानवीय पीड़ा 

किसी को घर में रहने का दुखकिसी को ना रहने के लिए घर होता हैमानवीय पीड़ा का भी आखिरआर्थिक स्तर होता है परदेस में तो हम भी थेदूसरा देश नहीं तो क्या प्रान्त थाअपने ना चाहे साथ थेपेट तो लेकिन शांत थाहम को घर पहुँचाने के लिएफिर क्यों कोई जहाज नहीं आयाहमारे घर जाने के … [Read more…]

Poem: प्यार का खर्च

निकलते तो सभी हैं प्यार की गुल्लक भरी ले कर एक गर्व के साथ एक ख़ुशी के साथ लगता है ये खज़ाना कभी भी ख़तम नहीं होगा पर ज़िन्दगी और पैसे की तरह ये जो प्यार है ना वो भी खर्च हो जाता है वो पहली लड़ाई वो पहला आरोप प्रत्यारोप वो माफ़ी न देने … [Read more…]

Poem: मुझे गर्व है हिंदी पर

मुझे गर्व है हिंदी परजो उर्दू को भी स्वीकार करती हैऔर अंग्रेजी को भीकुछ बदल जाती हैपर बहुत कुछ मिटता नहीं हैकोई मिठास लाता हैकोई नयी श्वास लाता हैहिंदी भाषा में हर कोईएक नया आभास लाता है मुझे गर्व है हिंदी परबिहार जाती है तोभोजपुरी बन जाती हैमिथिला जाती है तोमैथली बन जाती हैमुंबई जाती … [Read more…]

Poem: हम सब एक हैं

राजनीती कुछ और नहींबस रेखाएं हैंकुछ समय परऔर कुछ ज़मीन परएक तरह से देखो तोपहचान देने का माध्यमदूसरी तरह से देखो तोविभाजित करने का माध्यमसमय पर बनी रेखाकभी अहंकार से भर देती हैये काम हमारे पूर्वजों नेकिसी और से पहले कियाया कभी श्रेष्ठता का भावस्वयं के महान होने का भरोसाज़मीन पर रेखा हमेंपरिभाषित भी करती … [Read more…]