Poem: हम सब एक हैं

राजनीती कुछ और नहींबस रेखाएं हैंकुछ समय परऔर कुछ ज़मीन परएक तरह से देखो तोपहचान देने का माध्यमदूसरी तरह से देखो तोविभाजित करने का माध्यमसमय पर बनी रेखाकभी अहंकार से भर देती हैये काम हमारे पूर्वजों नेकिसी और से पहले कियाया कभी श्रेष्ठता का भावस्वयं के महान होने का भरोसाज़मीन पर रेखा हमेंपरिभाषित भी करती … [Read more…]

Poem: ये सियासत

यहाँ सब पे इलज़ाम-ए-कौम-ए-बेवफाई हैये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है सालों की दोस्तियां सियासती राय से टूटी जाती हैंये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है सदियों से रहे साथ उन को पाकिस्तान भेज देंगेये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है जिस को कहते हो मेरा दुश्मन वो मेरा … [Read more…]

Poem: प्रयागराज

उत्तर प्रदेश में कानून का राज हो गयाआखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया सालों से ना हुआ वो विकास आज हो गयाआखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया गुंडों से भयमुक्त पूरा समाज हो गयाआखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया देखो जंगल में भी राम राज हो गयाआखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया

Poetry: जुनून और सुकून

जुनून और सुकून कीज़ंग बहुत अज़ीम हैकभी चलते रहना भारी लगता हैकभी ठहराव का बोझ बड़ा होता हैचलते रहने में कई सवालातदिल को घेर लेते हैंकहाँ जा रहा हूँकहाँ तक पहुँचा हूँक्या यहीं आने के लिए निकला थाऔर भी कई सवालना जवाब मिलता है कभीऔर कभी जो जवाब मिलता हैवो दिल को मंज़ूर नहीं होताऔर … [Read more…]

Poem : सरहद

इक बार कभी इस सरहद पे कुछ ऐसा भी हो जाए तुम भी कुछ गीत सूनाओ हम भी कुछ गाने गायें बहुत हो चुका खेल खून का अब थोड़ा संगीत करें तुम छेड़ो एक नुसरत की धुन हम भी रफ़ी के गीत कहें माज़ी में तो खून है टपका तेरा भी और मेरा भी मेरा … [Read more…]

Poem : मुल्क आज़ाद हो गया है

अमन वाली बस्तियों में भीदंगा फसाद हो गया हैअभी अभी खबर आयी हैमुल्क आज़ाद हो गया है साठ बच्चे अस्पताल मेंतड़प तड़प के मर गयेसियासत के दलालों काघर आबाद हो गया हैअभी अभी खबर आयी हैमुल्क आज़ाद हो गया है धर्म और ज़ुबान से थक जाते हैंतो मुल्कों को लड़ाते हैंतिरंगे में एक और जवान … [Read more…]

Poem: रात हो चली है

रात हो चली है कोई किताब पढ़ने दो मुझेदिन के ज़ख्मों का कुछ तो हिसाब करने दो मुझे घर के हर कोने से कोई जाला गिरा जाता हैअपनी ज़ख़्मों को कुछ बा नक़ाब करने दो मुझे रोशनी में छुपे रहते हैं अंधेरों में निकल आते हैंअब तो खुद से ही सवाल-ओ-जवाब करने दो मुझे हमें … [Read more…]

Poem : अरमानों की चादरें

बहुत हल्के से ओढ़ रखी हैंअरमानों की चादरेंथोड़ी भी हवा आती हैउड़ जाती हैं पुरज़ोर नहीं हैं ज़िंदगी के रास्तेबिखरी हुई पगडंडियां हैंकोई सख्ती से चलता हैमुड़ जाती हैं कारोबार-ए-ज़िंदगी हमाराकुछ ऐसा चल रहा हैकुछ समुंदर निकल गये हम सेकुछ नदियाँ जुड़ जाती हैं ना खुशियों की कोई ख्वाइशना गम से गिला कोईक्या आशियाने बन … [Read more…]

Poem : कुछ भी नहीं है मेरा यहाँ

कुछ भी नहीं है मेरा यहाँकुछ भी नहीं ना रुखसत पे कोई आँसूना आने पे कोई गेसूना बाहों के कहीं घेरेना खिलते हुए चेहरे कुछ भी नहीं है मेरा यहाँकुछ भी नहीं ना जीने का सबब कोईना मरने की वजह कोईना सुबहो की कोई ख्वाइशना शामों का कोई अरमां कुछ भी नहीं है मेरा यहाँकुछ … [Read more…]