Poetry: जुनून और सुकून

जुनून और सुकून कीज़ंग बहुत अज़ीम हैकभी चलते रहना भारी लगता हैकभी ठहराव का बोझ बड़ा होता हैचलते रहने में कई सवालातदिल को घेर लेते हैंकहाँ जा रहा हूँकहाँ तक पहुँचा हूँक्या यहीं आने के लिए निकला थाऔर भी कई सवालना जवाब मिलता है कभीऔर कभी जो जवाब मिलता हैवो दिल को मंज़ूर नहीं होताऔर … [Read more…]



