Poem: ऊरà¥à¤œà¤¾ और परिà¤à¤¾à¤·à¤¾

देखा है कà¤à¥€ सूरज को उगते हà¥à¤ और डूबते हà¥à¤ कà¥à¤¯à¤¾ फरà¥à¤• होता है थोड़ा रौशनी का और बहà¥à¤¤ कà¥à¤› निकलता है सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¬à¤¹ à¤à¤• जोश के साथ बहà¥à¤¤ ऊरà¥à¤œà¤¾ लिठहà¥à¤ सà¥à¤¬à¤¹ का संचार करते हà¥à¤ हर कण कण में à¤à¤• सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¿à¤® चादर बिखेर तेता है पà¥à¤°à¤•ृति के हर आयाम में पà¥à¤°à¤¾à¤£ à¤à¤° देता … [Read more…]
