Poem : मेरी खुशियों का पौधा

मेरी खुशियों का पौधाकभी बड़ा नहीं होताकुछ शाखें निकलती हैंकुछ हरे पत्ते भीकुछ आशायें भी उगती हैकुछ घर भी बन जाते हैंमगर फिर कोई झोंकाफिर कोई टुकड़ा धूप काउड़ा देता है जला देता हैकभी कभी जड़ से ही हिला देता हैऔर बिखरी हुई शाखों मेंफिर से एक बीज ढूंढता हूँ मैंजिस बीज से उगेगाफिर एक … [Read more…]
