टूटी किश्ती

इस रास्ते पे चले आयेबहुत दूर तक बिना सोचेया शायद कुछ सोचा होगापर याद नहीं क्या थाकोई सैलाब आया होगाकोई आंधी भी आई थी शायदकुछ उड़ा के लिए गयीऔर कुछ बहा केपर कुछ तो बच ही गयाथोड़ा सहमा हुआ थोड़ा टूटा हुआहिम्मत कर के मेरी ओट मैंखुद को छिपाए हुएपर जो रह गयावो ज़रूरी थाजो … [Read more…]

अपना नाम तो तुम लिख ही लोगे

अपना नाम तो तुम लिख ही लोगेमेरे मकान-ओ-दर पेपर उन परिन्दों का क्या करोगेजो कभी अनायास हीकुछ ऐसे ही आ कर बैठ गए थेकुछ पानी पियाकुछ बातें हुईंकुछ अपनापन सा जाग उठाएक रिश्ता सा उग गयाएक सूखी सी शाख पेएक निशान है उस शाख पेउस रिश्ते का जिस मेंकहीं मेरा अक्स छुपा हैअपना नाम तो … [Read more…]

बुझती नहीं ये यारियां

बुझ गये सब रिश्ते नातेबुझ गयीं चिंगारियांजाने किस मिट्टी की हैं येबुझती नहीं ये यारियांरास्ते मुश्किल भी आयेआई कितनी आंधियांजाने किस मिट्टी की हैं येबुझती नहीं ये यारियांदौर रोज़ मिलने के आयेआई भी दुश्वारियांजाने किस मिट्टी की हैं येबुझती नहीं ये यारियांज़िन्दगी के बाद भीयाद आएंगी दिलदारियांजाने किस मिट्टी की हैं येबुझती नहीं ये यारियां

मौत की रोटी

A poem dedicated to those innocent kids who died in Bihar. मौत की रोटी बेचते हैंखुले आम ज़हर के सौदागरमासूम ज़िन्दगी की कीमतआज यहाँ कुछ भी नहींएक और किस्सा हुआएक और खबर बनीकुछ और ब्रेकिंग न्यूज़कुछ और इंटेलेक्चुअल व्यूज़होंगे आरोप और प्रत्यारोपकमेटियां बैठेंगी औरकुछ सवाल खड़े होंगेवक़्त गुज़रता जाएगाऔर भूल जाएगा ये सबहमारा अल्प स्मृति … [Read more…]

इंसानियत

सूडान के रेगिस्तान मेंभूखे नंगे इंसान मेंखून से लथपथहर सूखे हुए पथ परहर रोज़ मरती हूँ लेकिनमरती नहीं हूँ मैंअमेरिका के स्कूलों मेंमौत के खिलौनों मेंशिक्षक के खून में भींगीबेगुनाह बच्चों की सिसकी मेंहर रोज़ मरती हूँ लेकिनमरती नहीं हूँ मैंपाकिस्तान के जंगलों मेंधर्म के दंगलों मेंएक डरी और सहमी हुईमलाला के स्कूल जाते वक़्तहर … [Read more…]

वो दरख़्त

वो दरख़्तअपनी शाखों पेअनजान परिन्दों केआशियाने बनाता हुआवो दरख़्तएक अनजान मुसाफिरराहों की गर्द ले केथक कर बैठ गयाछाँव देता उस को भीवो दरख़्तझूमता रहता थामदमस्त हवाओं मेंख़ुशी सेवो दरख़्तआशियां परिन्दों केदर्द लेकिन दरख़्त कापरिन्दे कुतर कुतर केज़ख़्म देतेकतरे कतरे मेंफिर भी मुस्कुरातावो दरख़्तमुसाफिर को बससुध थीअपनी ही थकान कीक्या पता था उस कोकितना रोया थावो … [Read more…]

Poem dedicated to Delhi rape victim and many more

I dedicate this to Delhi rape victim and many more who suffer silently.  वो सहमी हुई होगीवो टूटी हुई होगीजब एक दरिंदे नेअपने आवेश मैंएक नापाक कदमउस की ओर बढ़ाया होगाइंसानियत को उस समयजाने क्या क्या याद आया होगाक्या सदियों सेरूढ़िवाद से लिपटे समाज कोउस चीख का दर्दसमझ आया होगादरिंदे तो फिर भीआख़िर दरिंदे हैंपर … [Read more…]

Jab Tak Hai Kaan

Naushad ke sangeet ki mastiyan OP Nayyar ki mast dhunein Shankar Jaikishan ki allhad sangeet SD da ke dil chhone wale geet Nahin bhooloonga main Jab tak hai kaan, Jab tak hai kaan Anu Malik ka shor Bappi Lahri ke disco geet Pritam ki churayi hui dhunein Nadeem-Shravan ka ho ho ho Nahin maaf karoonga … [Read more…]

दीवाली की रात

इस रात ये ज़िन्दगी ठिठुरेगी सहम जाएगीइस रात दीवाली हम से ना मनाई जाएगीकुछ अरसे से रोशनी हम से नाराज़ रहीकुछ अरसे से मध्यम ज़िन्दगी की आवाज़ रहीइस रात दिल की लौ सुबक सुबक के सो जाएगीइस रात दीवाली हम से ना मनाई जाएगीलाशों के साए उभरते हैं खून की नदियों सेइंसान का दुश्मन बना … [Read more…]