टूटी किश्ती
इस रास्ते पे चले आयेबहुत दूर तक बिना सोचेया शायद कुछ सोचा होगापर याद नहीं क्या थाकोई सैलाब आया होगाकोई आंधी भी आई थी शायदकुछ उड़ा के लिए गयीऔर कुछ बहा केपर कुछ तो बच ही गयाथोड़ा सहमा हुआ थोड़ा टूटा हुआहिम्मत कर के मेरी ओट मैंखुद को छिपाए हुएपर जो रह गयावो ज़रूरी थाजो … [Read more…]
