I dedicate this to Delhi rape victim and many more who suffer silently.
वो सहमी हà¥à¤ˆ होगी
वो टूटी हà¥à¤ˆ होगी
जब à¤à¤• दरिंदे ने
अपने आवेश मैं
à¤à¤• नापाक कदम
उस की ओर बढ़ाया होगा
इंसानियत को उस समय
जाने कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ याद आया होगा
कà¥à¤¯à¤¾ सदियों से
रूढ़िवाद से लिपटे समाज को
उस चीख का दरà¥à¤¦
समठआया होगा
दरिंदे तो फिर à¤à¥€
आख़िर दरिंदे हैं
पर सफ़ेदपोश लोगों के à¤à¥€
ये कैसे गोरखधंधे हैं
कà¤à¥€ नूडलà¥à¤¸ को और
कà¤à¥€ मोबाइल को
देखते नहीं कà¤à¥€ अपनी
दिल के मैल को
ये किस ओर
हमारा समाज अगà¥à¤°à¤¸à¤° है
इंसान हैं डरे हà¥à¤
और दरिंदों को
ना किसी का डर है
पीड़ा देने वाले
पीड़ित पे इलà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤® लगाते हैं
और निषà¥à¤ à¥à¤° शहरी लोग
परिवार के बहाने से
सब देख के चà¥à¤ª रह जाते हैं
ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं कहता ये कवि
बस इतना ही अनà¥à¤°à¥‹à¤§ है
अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बस इतना सिखा देना
किसी à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को
चाहे वो पà¥à¤°à¥à¤· हो या नारी
कà¤à¥€ वसà¥à¤¤à¥ की तरह ना समà¤à¥‹
कà¥à¤¯à¥‚ठकि टूटे हà¥à¤ दिल तो फिर à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼ जाते हैं
पर टूटा हà¥à¤† आतà¥à¤® समà¥à¤®à¤¾à¤¨ नहीं
– Birla
We are in a tragic situation, we always were, but now it has just crossed its limits.
इंसान हैं डरे हà¥à¤
और दरिंदों को
ना किसी का डर है…Wonderful Lines. 🙂
Keep Blogging!