इंसानियत

सूडान के रेगिस्तान में
भूखे नंगे इंसान में
खून से लथपथ
हर सूखे हुए पथ पर
हर रोज़ मरती हूँ लेकिन
मरती नहीं हूँ मैं

अमेरिका के स्कूलों में
मौत के खिलौनों में
शिक्षक के खून में भींगी
बेगुनाह बच्चों की सिसकी में
हर रोज़ मरती हूँ लेकिन
मरती नहीं हूँ मैं

पाकिस्तान के जंगलों में
धर्म के दंगलों में
एक डरी और सहमी हुई
मलाला के स्कूल जाते वक़्त
हर रोज़ मरती हूँ लेकिन
मरती नहीं हूँ मैं

दिल्ली की बसों में
वहशियों के अट्टहासों में
एक लोहे की नोक पे
लुटती हुई अस्मतों में
हर रोज़ मरती हूँ लेकिन
मरती नहीं हूँ मैं

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