बेसबब लिखता हूँ मैं
बेसबब लिखता हूँ मैंज़िन्दगी की चाल कोकौन समझा है यहाँकोई आता हैकोई जाता हैकुछ निशान छोड़ करकोई पहचान छोड़ करएक उजड़ी हुई बस्ती मेंएक टूटा हुआ मकान छोड़ करना आने का कोई सबब तेराना जाने का कोई सबब हैइस लिएबेसबब लिखता हूँ मैंकभी हैं कदम बहुत हलकेकभी बोझ हैं बलाओं सेकभी रात कटती है इक … [Read more…]
