वो गीता भी पढता था
वो कुरान पढता था
मज़हबों से कहीं आगे
वो इंसान पढता था
मिसाइल के मसाइल से भी
वाक़िफ़ था बहुत वो
पर चैन-ओ-अमन का कलाम
वो सुबह-शाम पढ़ता था
ना उत्तर से ना दक्षिण से
ना पूरब से ना पश्चिम से
वो क़ौम का बंदा था
वो हिन्दुस्तान पढ़ता था
वो गीता भी पढता था
वो कुरान पढता था
मज़हबों से कहीं आगे
वो इंसान पढता था
