मैं तुम से प्रेम करता हूँ
इस वाक्य का
कोई भी महत्व नहीं है
ये बस अभिव्यक्ति है
समय की किसी एक बिन्दु पर
जो बदल जाती है
किसी और बिन्दु पर
एक क्षणिक आभास है
एक क्षणिक भावना का
जो किसी और क्षण में बदल जाने से
कुछ अधिक दुख देता है
प्रेम तो वो है जो बिन्दु नहीं हो
एक रेखा हो
अनगिनत बिंदुओं से बनी हुई
हर बिन्दु ने जब एक
अमिट चिन्ह छोड़ा हो
आत्मा की गहराईयों तक
ओत प्रोत किया हो
अस्तित्व के मूल कारण को
ताकि समय के सूर्यास्त में
एक थकी हुई किरण से
एक अडिग सी ध्वनि आये
वो मुझ से प्रेम करता था