Poem : रिश्ता

बस दो ही रिश्ते अहम होते हैं
एक दर्द का रिश्ता
दूसरा दर्द से रिश्ता

दर्द के रिश्ते में होता है
बहुत कुछ साझा करने के लिए
कई बार उस से दर्द कम होता है
कई बार बस बह जाता है
कभी बस एक अहसास देता है
कि दुनिया में और भी हैं
जो दर्द के दरिया में डूबे हुए हैं
कभी तुम से भी ज़्यादा
कभी थोड़ा कम
डूबे हुए लोगों में भी
दरिया एक जरिया बन जाता है

दर्द से रिश्ता कुछ और ही होता है
पहले तो लगता है पराया सा
पर धीरे धीरे रूह में घर बना लेता है
अपने अस्तित्व की परिभाषा का
एक हिस्सा बन जाता है
लगता है कि अगर चला गया तो
कितना खालीपन रह जायेगा
शून्यता से बेहतर तो
दर्द का साथ लगने लगता है

बस दो ही रिश्ते अहम होते हैं
एक दर्द का रिश्ता
दूसरा दर्द से रिश्ता

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